अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत उमर रदि अल्लाहु अन्हु से फरमाया: إِيْهٍ يا ابن الخطاب، والذي نفسي بيده ما لقيك الشيطان سالكا فجا قط إلا سلك فجا غير فجك (صحيح البخاري، الرقم: ٣٦٨٣) ऐ खत्ताब के बेटे! उसकी क़सम जिसके क़ब्ज़े में मेरी जान है! शैतान …
اور پڑھوउम्मत का दुरूद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम तक पहुंचना
अपने घरों को क़ब्रस्तान न बनावो (घरों को नेक आमालः नमाज़, तिलावत और ज़िक्र वग़ैरह से आबाद रखो. उन को…
मोहब्बत का बाग (किस्त: 81)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बुलंद मकाम अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त के तमाम बंदों में से नबियों (पैग़ंबरो…
मुसीबतों के वक़्त सब्र करना
हज़रत मौलाना मुहम्मद इल्यास साहिब रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: सब कारकुनों को समझा दो कि…
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की शफ़ाअत
नुज़हतुल मजालिस में लिखा है के बाज़ सुलहा में से एक साहब को हबसे बौल हो गया(पेशाब रूक गया). उन्होंने…
वफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
નવા લેખો
दीन के अ’हकाम में सबसे ज्यादा मजबूत
हज़रत नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: وأشدهم في أمر الله عمر (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧٩١) मेरी उम्मत में अल्लाह तआला के दीन के मामले में सबसे मजबूत उमर है (यानी वह निहायत मजबूती के साथ भलाई का हुक्म करने का और बुराई से रोकने का फ़रीज़ा …
اور پڑھوनबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दो वजीर
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ما من نبي إلا له وزيران من أهل السماء ووزيران من أهل الأرض، فأما وزيراي من أهل السماء فجبريل وميكائيل، وأما وزيراي من أهل الأرض فأبو بكر وعمر (سنن الترمذي، الرقم: 3680) जो भी नबी गुज़रे, उस के लिए आसमान वालों में …
اور پڑھوअल्लाह तआला की तरफ से हक का इल्हाम
हज़रत नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: إن الله جعل الحق على لسان عمر وقلبه (أي: أجراه عليهما) (سنن الترمذي، الرقم: ٣٦٨٢) अल्लाह तआला ने उमर (रदि अल्लाहु अन्हु) की ज़ुबान और दिल पर हक़ बात डाल दी है (यानी अल्लाह ताला …
اور پڑھوनबी ए करीम सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम की दुआ
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम ने दुआ फरमाई: اللهم أعز الإسلام بأحب هذين الرجلين إليك بأبي جهل أو بعمر بن الخطاب قال عبد الله بن عمر رضي الله عنهما: وكان أحبهما إليه عمر (سنن الترمذي، الرقم: ٣٢٨١) ओ अल्लाह! उमर बिन खत्ताब और अबू जहल में से जो आप …
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