हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: लोग आ’माल को देखते हैं; मगर देखने की चिज़ है दिल, कि उसके दिल में अल्लाह और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मोहब्बत और ‘अज़मत (इज़्ज़त,बड़ाई) किस क़दर है। देहाती हैं,गंवार लोग हैं; मगर उनके दिल में अल्लाह …
اور پڑھوरसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – २
पुख़्ता ईमान और कामिल यक़ीन का फ़रीज़ा दूसरा फ़रीज़ा यह है कि हम नबी करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम …
हज़रत उ़मर रज़ियल्लाहु अ़न्हु की ज़बान से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु के अज़ीम इल्म की तारीफ़
في إحدى المرّات، سُئل سيّدنا عمر رضي الله عنه عن مسألة، وكان سيّدنا عبد الله بن مسعود رضي الله عنه ج…
गुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
एक हज़ार दिन तक सत्तर फरिश्तों का सवाब लिखना
عن ابن عباس رضي الله عنهما قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم من قال جزى الله عنا محمدا بما هو أه…
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दुवा की सुन्नतें और आदाब – ४
दुआ की क़ुबूलियत के समय अज़ान और जिहाद के वक्त हज़रत सहल बिन सअ्द रदि अल्लाहु ‘अन्हू से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: दो वक्त की दुआ रद नहीं की जाती हैं या बहुत कम रद की जाती हैं: एक अज़ान के वक्त और दूसरी …
اور پڑھوहज़रत सअ्द रदि अल्लाहु ‘अन्हू के लिए रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पेशीन-गोई
हज-ए-विदा’ के मौके पर जब हज़रत सअ्द रदि अल्लाहु ‘अन्हू बिमार थे और उन्हें अपनी वफ़ात का अंदेशा था, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे फ़रमाया: ولعلك تخلف حتى ينفع بك أقوام ويضر بك آخرون तुम ज़रूर ज़िन्दा रहोगे; यहां तक कि बहुत से लोगों को आप की …
اور پڑھوअम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की ज़िम्मे दारी – प्रकरण-७
लोगों की इस्लाह के वक्त रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अंदाज हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रदि अल्लाहु ‘अन्हुमा का एक बूढ़े शख्स को वुज़ू का सही तरीका सिखाना एक बार मदीना मुनव्वरा में एक बूढ़ा शख्स आया। नमाज़ के वक्त जब वो वुज़ू करने लगा, तो हज़रत हसन …
اور پڑھوरसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम की मुबारक ज़बान से हज़रत सअ्द रदि अल्लाहु ‘अन्हु की तारीफ
हज़रत सअ्द रदि अल्लाहु ‘अन्हू एक दफा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम के पास आए। उन्हें देखकर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: هذا خالي فليُرِني امرؤ خاله. (جامع الترمذي، الرقم: ٣٧٥٢) ये मेरे मामूँ हैं। किसी का मामूँ, मेरे मामूँ की तरह है, तो वो मुझे दिखाए। हज़रत …
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