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मोहब्बत का बग़ीचा (उनतीसवां प्रकरण)‎

بسم الله الرحمن الرحيم वालिदैन का अपनी औलाद के लिए अमली नमूना नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) अल्लाह तआला की तमाम मख़लूक़ में से सब से अफ़ज़ल और बरतर थे. अल्लाह तआला ने आप को अपना आख़री रसूल बना कर भेजा और आप को सब से बेहतरीन दीन, दीने इस्लाम …

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कुफ़र तमाम रज़ीला (घटिया) अख़लाक़ की जड़ है

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः ‎“कुफ़र जड़ है तमाम अख़लाक़े रज़ीला (घटिया अख़लाक़) की और इस्लाम जड़ है तमाम अख़लाक़े हमीदा (अच्छे अख़लाक़) की, इस लिए कुफ़र के होते हुए इत्तिफ़ाक़ होना (सहमत होना) अत्यंत अजीब (ताज्जुब) है और इस्लाम के होते हुए ना …

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क़ुर्आने करीम में सहाबए किराम (रज़ि.) की तारीफ़ तथा प्रशंसा

रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़बर गीरी के लिए एक अन्सारी महिला की बैचेनी उहद की लऱाई में मुसलमानों को तकलीफ़ भी बोहत पहुंची और शहीद भी बोहत हुए. मदीना तय्यीबा में यह वहशत अषर ख़बर पहुंची तो औरतें परेशान होकर हाल की स्थिति की जांच के लिए घर से निकल …

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तलाक़ की सुन्नतें और आदाब – ३

तलाक़ की सुन्नतें और आदाब (१) शौहर जल्द बाज़ी अथवा ग़ुस्से की हालत में अपनी बिवी को तलाक़ न दे, बलकि तलाक़ देने से पेहले उस को चाहिए के वह संजीदगी से इस मामले पर अच्छी तरह ग़ौरो फ़िकर करे. अच्छी तरह ग़ौरो फ़िकर करने के बाद अगर उस को …

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तलाक़ की सुन्नतें और आदाब – २

वैवाहिक विवाद को ख़तम करना जब मियां बिवी के दरमियान तलाक़ के ज़रीए फ़ुरक़त (जुदाई) होती है, तो उस वक़्त दो अफ़राद जुदा नहीं होते हैं, बलके दो ख़ानदानों में अलाहीदगी होती है. उस के अलावह अगर मियां बिवी के बच्चे हों, तो मियां बिवी की अलाहीदगी की वजह से …

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