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ऐसी मज्लिस का अंजाम जिस में न अल्लाह का ज़िक्र किया जाए और न ही दुरूद पढ़ा ‎जाए

ऐसी मजलिस जिस में अल्लाह तआला का ज़िकर नही किया और रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) पर दुरूद नहीं पढ़ा गया, उस को बहोत ज़्यादह बदबूदार मुरदार से तशबीह दी गई है जिस के क़रीब जाना कोई पसंद नही करता है...

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हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की फ़ज़ीलत के बारे में हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की गवाही

كان سيدنا عمر رضي الله عنه يقول: أبو بكر سيدنا، وأعتق سيدنا يعني بلالا (صحيح البخاري، الرقم: 3754) ​हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाया करते थे: “अबू-बक्र हमारे सरदार हैं और उन्होंने हमारे सरदार (यानी बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु) को आज़ाद किया।” मुल्के-शाम में हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की अज़ान यह वाकया …

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दुरूद-शरीफ लिखने वाले के लिए फ़रिश्तों का मग्फ़िरत तलब करना

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من صلى علي في كتاب لم تزل الملائكة تستغفر له ما دام اسمي في ذلك الكتاب (المعجم الأوسط للطبراني، الرقم: ۱۸۳۵، وسنده ضعيف كما في كشف الخفاء، الرقم: ۲۵۱۸) हज़रत अबू-हुरैरह रज़ियल्लाहु ‘अन्हु से रिवायत है …

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कुरान शरीफ के साथ जुड़े हुए गिलाफ को छूने का मसअला

​सवाल: क्या कुरान-शरीफ से मुत्तसिल (यानी जुड़े हुए) गिलाफ को छूने के लिए बा-वज़ू (वज़ू के साथ) होना ज़रूरी है? ​जवाब: हां। चूंकि यह गिलाफ कुरान-मजीद के साथ मुत्तसिल (जुड़ा हुआ) है; इसलिए इसे छूने के लिए बा-वज़ू होना ज़रूरी होगा। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. (ومنها) حرمة مس …

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