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जुम्आ के दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ने की वजह से अस्सी (८०) साल के गुनाहों की माफ़ी और अस्सी (८०) साल की इबादतों का षवाब

जुम्आ के दिन असर की नमाज़ के बाद अपनी जगह से उठने से पेहले अस्सी (८०) मर्तबा नीचे लीखा हुवा दुरूद पढ़ता है उस के अस्सी (८०) साल के गुनाह माफ़ कर दिये जाते हैं और उस को अस्सी (८०) साल की इबादतों का षवाब मिलता हैः اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ وَعَلٰى آلِهِ وَسَلِّمْ تَسْلِيْمًا “ए अल्लाह ! उम्मी नबी मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) और उन की आलो औलाद पर ख़ूब ख़ूब दुरूदो सलाम भेज.”۔۔۔

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फज़ाइले-आमाल – ३६

हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का सदक़ा की खजूर के ख़ौफ़ से तमाम रात जागना एक बार नबी-ए-करिम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम तमाम रात जागते रहे और करवतें बदलते रहे। अज़वाज-ए-मुतह्हरात में से किसी ने उरज किया: ‘या रसूलल्लाह! आज नींद नहीं आती?’ इरशाद फरमाया कि एक खजूर परी हुई थी, मैं …

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बाग-ए-मोहब्बत (किस्त-८०)

इस्लाम की करेंसी इस दुनिया की ज़िंदगी में इन्सान की एक बुनियादी फिक्र ‘माल’ हासिल करना है। इसकी वजह यह है कि इन्सान माल को इस दुनिया की करेंसी समझता है और वह यह भी जानता है कि वह इस माल के ज़रिए कितने फायदे हासिल कर सकता है। इन्सान …

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