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क़यामत के दिन नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम के ‎पड़ोसी होने का शर्फ़

“जो शख़्स इरादा कर के मेरी ज़ियारत करे वह क़यामत में मेरे पड़ोस में होगा और जो शख़्स मदीना में क़याम करे और वहां की तंगी और तकलीफ़ पर सबर करे...

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वर्ल्ड कप देखना और वर्ल्ड कप के मैचों में टीमों को सपोर्ट करना

सवाल: मोहतरम मुफ़्ती साहब! मौजूदा फुटबॉल वर्ल्ड कप (Football World Cup) के बारे में यह पूछना है कि लोग अपनी पसंदीदा टीम की जीत के लिए दुआ करते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं, सदक़ा देते हैं और कुछ लोग अपनी पसंदीदा टीम के गोल करने या मैच जीतने पर सज्दा करते …

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फज़ाइले-आमाल – ३७

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु का एक काहिन के खाने से क़ै करना हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु का एक गुलाम था, जो गल्ला के तौर पर अपनी आमदनी में से हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु की खिदमत में पेश किया करता था । एक मर्तबा वह कुछ खाना लाया …

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क़ुरआन मजीद में दुरूद का हुक्म

क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला ने अपने बन्दों को कुछ कामों का हुक्म दिया है, जैसे कि नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात वग़ैरह। इसी तरह क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें भी हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला अपने कुछ ख़ास बन्दों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई फ़रमाता है …

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