जुम्आ के दिन असर की नमाज़ के बाद अपनी जगह से उठने से पेहले अस्सी (८०) मर्तबा नीचे लीखा हुवा दुरूद पढ़ता है उस के अस्सी (८०) साल के गुनाह माफ़ कर दिये जाते हैं और उस को अस्सी (८०) साल की इबादतों का षवाब मिलता हैः اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ وَعَلٰى آلِهِ وَسَلِّمْ تَسْلِيْمًا “ए अल्लाह ! उम्मी नबी मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) और उन की आलो औलाद पर ख़ूब ख़ूब दुरूदो सलाम भेज.”۔۔۔
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3 weeks ago
वफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
4 weeks ago
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद
अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने व…
4 weeks ago
ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना
“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल…
4 weeks ago
अज़ान के बाद दुरूद शरीफ पढ़ना
ए अल्लाह ! मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को “वसीला”(पूरी उम्मत के लिए सिफ़ारिश का हक़) अता फ़रमा…
4 weeks ago
दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से अस्सी साल के गुनाहों की माफ़ी और पुल सिरात पर रोशनी
हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के मु…
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हज के पांच दिन – १० ज़िल-हिज्जा
फज़ाइले-आमाल – ३६
हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का सदक़ा की खजूर के ख़ौफ़ से तमाम रात जागना एक बार नबी-ए-करिम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम तमाम रात जागते रहे और करवतें बदलते रहे। अज़वाज-ए-मुतह्हरात में से किसी ने उरज किया: ‘या रसूलल्लाह! आज नींद नहीं आती?’ इरशाद फरमाया कि एक खजूर परी हुई थी, मैं …
اور پڑھوबाग-ए-मोहब्बत (किस्त-८०)
इस्लाम की करेंसी इस दुनिया की ज़िंदगी में इन्सान की एक बुनियादी फिक्र ‘माल’ हासिल करना है। इसकी वजह यह है कि इन्सान माल को इस दुनिया की करेंसी समझता है और वह यह भी जानता है कि वह इस माल के ज़रिए कितने फायदे हासिल कर सकता है। इन्सान …
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