मरीज़ की इयादत के वक़्त की दुआएं
पेहली दुआः
لَا بَأْسَ طَهُوْرٌ إِنْ شَاءَ اللهُ
“घबराने की कोई बात नहीं, (यह बीमारी) पाक-साफ करने वाली है, इन्शाअल्लाह।” (सहीह बुख़ारी)
दूसरी दुआः
أَسْألُ اللهَ الْعَظِيْمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيْمِ أَنْ يَّشْفِيَكَ
मैं अल्लाह से सवाल करता हूं, जो कि अज़ीम है अर्शे-अज़ीम का परवरदिगार है कि वह तुझे शिफ़ा दे।
हज़रत इब्ने-अब्बास रज़ियल्लाहु अ़न्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: जो शख़्स सात मर्तबा ऊपर ज़िक्र की गई दुआ किसी ऐसे बीमार आदमी पर पढ़े, जिसकी मौत इस बीमारी में मुक़द्दर न हो, तो अल्लाह त’आला उस आदमी को इस बीमारी से शिफ़ा अता फ़रमाएगा। (सुनन अबी-दाऊद, अर्-रक़म: ३१०६; सुनन अत्-तिरमिज़ी, अर्-रक़म: २०८३)
तीसरी दुआ
أَذْهِبِ الْبَأْسَ رَبَّ النَّاسِ وَاشْفِ أَنْتَ الشَّافِيْ لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا
तमाम लोगों के रब सख्ती को दूर फ़रमा और शिफ़ा अता फ़रमा। तू ही शिफ़ा देने वाला है। तेरी शिफ़ा के सिवा कोई शिफ़ा नहीं। ऐसी शिफ़ा अता फ़रमा, जिससे कोई बीमारी बाक़ी न रहे।
चौथी दुआ
بِاسْمِ اللهِ أَرْقِيْكَ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيْكَ مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنٍ حَاسِدٍ اللهُ يَشْفِيْكَ بِاسْمِ اللهِ أَرْقِيْكَ
अल्लाह का नाम लेकर मैं तुम पर (इन अल्फ़ाज़ से) दम करता हूं (यानी तुम्हारे लिए अल्लाह से शिफ़ा मांगता हूं) हर उस चीज़ से, जो तुम को नुक़सान पहुंचा रही है, हर नफ़्स या हसद करने वाली आंख से। अल्लाह तुम को शिफ़ा अता फ़रमाए। अल्लाह का नाम लेकर तुम पर (इन अल्फ़ाज़ से) दम करता हूं।
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