फज़ाइले-आमाल – ३७

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु का एक काहिन के खाने से क़ै करना

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु का एक गुलाम था, जो गल्ला के तौर पर अपनी आमदनी में से हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु की खिदमत में पेश किया करता था ।

एक मर्तबा वह कुछ खाना लाया और हजरत ने उसमें से एक लुक्मा नोश फ़र्माया। गुलाम ने अर्ज़ किया आप रोज़ाना दर्याफ़्त फ़र्माया करते थे कि किस ज़रिए से कमाया, आज दर्याफ़्त नहीं फ़र्माया। आपने फ़र्माया कि भूख की शिद्दत की वजह से दर्याफ़्त करने की नौबत नहीं आई।

अब बताओ। अर्ज़ किया कि ज़माना-ए-जाहिलियत में एक क़ौम पर गुज़रा और उनपर मन्तर पढ़ा। उन्होंने मुझ से वायदा कर रखा था, आज मेरा गुज़र उधर को हुआ तो उनके यहां शादी हो रही थी। उन्होंने यह मुझे दिया था। हजरत अबूबक्र रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया तू मुझे हलाक ही कर देता।

उसके बाद हलक़ में हाथ डालकर क़ै करने की कोशिश की, मगर एक लुक्मा वह भी भूख की शिद्दत की हालत में खाया गया, न निकला। किसी ने अर्ज़ किया पानी से क़ै हो सकती है। एक बहुत बड़ा प्याला पानी का मंगवाया और पानी पी-पी कर क़ै फ़रमाते रहे, यहां तक कि वह लुक्मा निकला।

किसी ने अर्ज़ किया कि अल्लाह आप पर रहम फ़रमाएं। यह सारी मशक़्क़त उस एक लुक्मे की वजह से बर्दाश्त फ़रमाई। आपने इर्शाद फ़र्माया कि अगर मेरी जान के साथ यह लुक्मा निकलता, तो मैं निकालता। मैंने हुजूर सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से सुना है कि जो बदन माले-हराम से परवरिश पाये, आग उसके लिए बेहतर है। मुझे यह डर हुआ कि मेरे बदन का कोई हिस्सा इस लुक्मे से परवरिश न पा जाये।’

फ़ायदा: हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु को इस क़िस्म के वाक़िआत मुतअद्दिद (कई) बार पेश आये कि एहतियात मिज़ाज में ज्यादा थी। थोड़ी सा भी शुब्हा हो जाता तो क़ै फ़रमाते थे।

बुखारी-शरीफ़ में एक और क़िस्सा इसी क़िस्म का है कि किसी गुलाम ने ज़माना-ए-जाहिलियत में कोई कहावत यानी गैब की बात नजूमियों के तौर पर किसी को बतलाई थी, वह इत्तिफ़ाक़ से सही हो गई। उन लोगों ने उस गुलाम को कुछ दिया, जिसको उन्होंने अपनी मुकर्ररा रक़म में हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु को लाकर दिया। हज़रत ने नोश फ़रमाया और फिर जो कुछ पेट में था, सब क़ै किया।

इन वाक़ियात में गुलामों का माल जरूरी नहीं कि नाजायज़ ही हो, दोनों एहतेमाल हैं, मगर हज़रत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु की कमाले-एहतियात ने मुश्तबह माल को भी गवारा न किया ।

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