
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया:
आदमी ख़्वाह कितना ही आलिम, ज़ाहिद और मुत्तक़ी व परहेज़गार हो लेकिन इस को यह क्या ख़बर कि मैं ख़ुदा के नज़दीक कैसा हूं।
इस एह़्तेमाल के होते हुए कोई क्या दावा कर सकता है? क्योंकि सारा दारो-मदार इसी पर है कि ख़ुदा के नज़दीक अच्छा हो और इस की यक़ीनन किसी को भी ख़बर नहीं। (मल्फ़ूज़ात हकीमुल उम्मत, ज. १०, पेज नंबर. ३३)
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