
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास साहब रहमतुल्लाही अलैह ने एक मर्तबा तालिबे-इल्मों से इरशाद फ़रमाया:
“तुम अपनी क़द्र व क़ीमत तो समझो! दुनिया भर के ख़ज़ाने भी तुम्हारी क़ीमत नहीं। अल्लाह तआला के सिवा कोई भी तुम्हारी क़ीमत नहीं लगा सकता।
तुम अम्बिया अलैहिमुस्सलाम के नाइबीन (नाइब की जमा) हो, जो सारी दुनिया से कह देते हैं:
إِنْ أَجْرِيَ إِلاَّ عَلَى اللَّهِ
“मेरा अज्र (मज़दूरी/बदला) अल्लाह पर है।”
तुम्हारा काम यह है कि सब लोगों से अपनी उम्मीदों को मुन्क़ते (ख़त्म) करते हुए और सिर्फ़ अल्लाह के अज्र पर पूरा यक़ीन और भरोसा रखते हुए, तवाज़ु और तज़ल्लुल (अपने आप को छोटा या कमतर पेश करना) के साथ मोमिनों की ख़िदमत करो।
इसी से ‘अब्दिय्यत की तकमील और तज़ईन (सँवारना) होगी।” (मलफ़ूज़ात हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास रहमतुल्लाही अलैहि, पेज: १०६)
Alislaam.com – اردو हिन्दी ગુજરાતી