चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ में क़ादा-ए-अख़ीरा भूल जाना

सवाल: एक आदमी चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहा था। चौथी रकात अदा करने के बाद वह क़ादा-ए-अख़ीरा (दूसरे अत्तहियात) के लिए नहीं बैठा; बल्कि भूल कर पाँचवीं रकात के लिए खड़ा हो गया। फिर उसने पाँचवीं रकात में रुकू और सजदा भी कर लिया, उसके बाद वह तशहुद (अत्तहिय्यात) के लिए बैठा और सलाम फेर दिया।

इस सूरत में उसकी नमाज़ का क्या हुक्म है? क्या उसकी फ़र्ज़ नमाज़ दुरुस्त हो गई या उस पर नमाज़ को दोहराना लाज़िम होगा?

जवाब: चार रकात वाली फ़र्ज़ नमाज़ में क़ादा-ए-अख़ीरा करना फ़र्ज़ है। अगर कोई शख़्स क़ादा-ए-अख़ीरा के लिए नहीं बैठा, तो उसकी फ़र्ज़ नमाज़ अदा नहीं होती और उस पर नमाज़ को दोहराना लाज़िम हो जाता है। लिहाज़ा, चूँकि वह शख़्स चौथी रकात में क़ादा-ए-अख़ीरा के लिए नहीं बैठा था, इसलिए उसकी वह फ़र्ज़ नमाज़ दुरुस्त नहीं हुई और उस पर उन चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ का इआदा करना (यानी नमाज़ को दोबारा पढ़ना) लाज़िम है।

फ़क़त और अल्लाह तआला ही ज़्यादा जानने वाले हैं।

दारुल इफ़्ता, मद्रसा तालीमुद्दीन

इसपिंगो बीच, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका

Check Also

कुरान शरीफ के साथ जुड़े हुए गिलाफ को छूने का मसअला

​सवाल: क्या कुरान-शरीफ से मुत्तसिल (यानी जुड़े हुए) गिलाफ को छूने के लिए बा-वज़ू (वज़ू …