फज़ाइले-आमाल – ३६

हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का सदक़ा की खजूर के ख़ौफ़ से तमाम रात जागना

एक बार नबी-ए-करिम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम तमाम रात जागते रहे और करवतें बदलते रहे।

अज़वाज-ए-मुतह्हरात में से किसी ने उरज किया: ‘या रसूलल्लाह! आज नींद नहीं आती?’
इरशाद फरमाया कि एक खजूर परी हुई थी, मैं ने उठा कर खाली थी के जाऐइ न हो जाए अब मुझे यंह फिक्र है कि कहीं वह सदक़ा की न हो।

फायदा: अकरब यही है कि वह हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम की अपनी ही होगी, मगर चूंकि सदक़ा का माल हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम के यहां आता था, इस शक़ की वजह से नबी-ए-करिम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम को रात भर नींद नहीं आई कि खुदा-न-ख्वास्ता वह सदक़ा की हो और इस सूरत में सदक़ा का माल खाया गया हो।

यंह तो आका हाल है कि महज शक़ की बीना पर रात भर करवतें बदलीं और नींद नहीं आई। अब गुलामों का हाल देखो कि रिश्वत, सूद, चोरी, डाका, हर किस्म का नाजायज़ माल किस सरखोइ से खाते हैं और नाज से अपने आप को गुलाम-ए-मुहम्मद गिनते हैं।

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