रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम का जन्नत में हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु के जूतों की आवाज़ सुनना

ذات مرة، قال رسول الله صلى الله عليه وسلم لسيدنا بلال رضي الله عنه: سمعت الليلة خشف نعليك بين يدي في الجنة (في رؤيا أريته) (من صحيح مسلم، الرقم: 2458)

​रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम ने एक मर्तबा हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु को मुख़ातिब कर के फ़रमाया:

​”गुज़िश्ता रात (ख़्वाब में) मैंने जन्नत में अपने आगे तुम्हारे जूतों की आवाज़ सुनी।”

हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु के जूतों की आहट और नमाज़े-तहिय्यतुल वुज़ू

हज़रत अबू-हुरैरा रद़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि एक मर्तबा फ़र्ज़ नमाज़ के वक़्त रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) ने हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु से फ़रमाया:

“ऐ बिलाल! मुझे यह बताओ कि तुम्हारे आमाल में से वह कौन सा अमल है, जिससे तुमको सबसे ज़्यादा उम्मीद है कि वह आख़िरत में तुम्हारे लिए फायदेमंद होगा; क्योंकि बीती रात (ख़्वाब में) मैंने जन्नत में अपने आगे तुम्हारे जूतों की आहट सुनी।”

हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया:

“मुझे जिस अमल से सबसे ज़्यादा फायदे की उम्मीद है वह यह है कि मैं दिन या रात में जब भी वुज़ू करता हूं, तो उस वुज़ू के बाद नमाज़ पढ़ता हूं (यानी मैं तहिय्यतुल-वुज़ू की नमाज़ पढ़ता हूं)।”

इस हदीस में हम देखते हैं कि नमाज़ पढ़ने की वजह से हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु को जन्नत में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की सोहबत का शर्फ़ नसीब हुआ, आप सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के ख्वाब।

हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु का रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के आगे चलना इसी तरह है, जिस तरह एक खादिम अपने मख़्दूम के आगे चलता है, ताकि वह उनकी खिदमत करे और उनके आराम का ख्याल रखे।

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