हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु – हब्शियों में सबसे पहले मुसलमान

عن سيدنا أنس رضي الله عنه أنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: السباق (أقوامهم إلى الإسلام) أربعة: أنا سابق العرب (جئتنهم بالإسلام)، وسلمان سابق الفرس (إلى الإسلام)، وبلال سابق الحبشة (إلى الإسلام)، وصهيب سابق الروم (إلى الإسلام) (المستدرك، الرقم: ٥٢٤٣)

हज़रत अनस रद़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया:

चार लोगों ने सबक़त की (इस्लाम लाने में अपनी-अपनी क़ौमों से आगे बढ़े):

मैं (मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अरबों में से सबसे पहला हूं (क्यों कि मैं अरब के पास दीन-ए-इस्लाम लाया हूं)। सलमान फ़ारसियों में (इस्लाम लाने में) सबसे पहले हैं। बिलाल हब्शियों में (इस्लाम लाने में) सबसे पहले हैं। और सुहैब रूमियों में (इस्लाम लाने में) सबसे पहले हैं।

इस्लाम पर हज़रत बिलाल हब्शी रद़ियल्लाहु अन्हु का मज़बूती के साथ डटे रहना

हज़रत बिलाल हब्शी रद़ियल्लाहु अन्हु एक मशहूर सहाबी हैं, जो हमेशा मस्जिद-ए-नबवी के मुअज़्ज़िन रहे। शुरू में एक काफ़िर के गुलाम थे। इस्लाम ले आए, जिसकी वजह से तरह-तरह की तकलीफ़ें दी जाती थीं।

उमैय्या बिन ख़लफ़, जो मुसलमानों का सख़्त दुश्मन था, उन्हें सख्त गर्मी में, दोपहर के वक़्त तपती हुई रेत पर सीधा लिटाकर उनके सीने पर पत्थर की बड़ी चट्टान रख देता था, ताकि वो हरकत न कर सकें, और कहता था कि या तो इसी हाल में मर जाओ, या अगर ज़िंदगी चाहते हो तो इस्लाम से हट जाओ। मगर वह इस हालत में भी “अह़द! अह़द!” (यानी, पूजने के लायक ज़ात एक ही है! पूजने के लायक ज़ात एक ही है!) कहते थे।

रात को उन्हें ज़ंजीरों में बांधकर कोड़े लगाए जाते थे, और अगले दिन उन्हीं ज़ख़्मों को गर्म ज़मीन पर डालकर और ज़्यादा ज़ख़्मी किया जाता था ताकि वह बेचैन और बेकरार होकर इस्लाम से फिर जाएं या तड़प-तड़प कर मर जाएं।

अज़ाब देने वाले उकता जाते। कभी अबू-जहल का नम्बर आता, कभी उमैय्या बिन ख़लफ़ का, कभी औरों का, और हर शख़्स इसकी कोशिश करता कि तकलीफ़ देने में अपना ज़ोर ख़त्म कर दे। हज़रत अबू-बक्र सिद्दीक़ रद़ियल्लाहु अन्हु ने जब उन्हें इस हालत में देखा, तो उनको ख़रीदकर आज़ाद फ़रमाया।

चूंकि अरब के बुत-परस्त अपने बुतों को भी ‘माबूद कहते थे, इसलिए उनके मुक़ाबले में इस्लाम की तालीम तौहीद की थी, जिसकी वजह से हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु की ज़बान पर “अह़द! अह़द!” (“एक ही एक”) का विर्द था। यह इश्क़ और ताल्लुक़ की बात है।

Check Also

हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की फ़ज़ीलत के बारे में हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की गवाही

كان سيدنا عمر رضي الله عنه يقول: أبو بكر سيدنا، وأعتق سيدنا يعني بلالا (صحيح …