कर्ज़ की अदायगी में सहूलत का नुस्खा

शेखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया:

एक बात कहता हूं, अब उसको चाहे तुम मेरी नसीहत समझो, वसीयत समझो या तजुर्बा।

वह यह कि अगर किसी से कर्ज़ लो तो देने की निय्यत खालिस रखो (कि उसको अदा करना ही है) और फिर वक़्त पर फौरन अदा करो (चाहे दूसरी जगह से कर्ज़ लेकर ही अदा करना पड़े)।

निय्यत खालिस रखो तो अल्लाह की जानिब से खूब मदद होगी। (मलफ़ूज़ात हज़रत शैख़ (रह.), पेज नं- २३)

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