
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام على النبي صلى الله عليه وسلم أفضل من عتق الرقاب وحبّ رسول الله صلى الله عليه وسلم أفضل من مهج الأنفس أو قال: من ضرب السيف في سبيل الله (رواه النميري وابن بشكوال موقوفا كما في القول البديع صـــ 263)
हज़रत अबू-बक्र सिद्दीक रज़ियल्लाहु अन्हु फ़र्माते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम पर दुरूद भेजना गुनाहों को ज़्यादा मिटा देता है; आग को बुझाने वाले पानी से भी ज़्यादा और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम पर सलाम भेजना गुलामों को आज़ाद करने से भी ज़्यादा अफ़ज़ल है और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम से मुहब्बत करना अल्लाह की राह (जिहाद) में दुश्मन को मारने से ज़्यादा अफ़ज़ल है।
दिन पर रात की फ़ज़ीलत
नुज़हतुल-मजालिस में एक अजीब क़िस्सा लिखा है कि रात और दिन में आपस में मुनाज़रा (डिबेट) हुवा के हम में से कौनसा अफ़ज़ल (सबसे उत्कृष्ट) है।
दिन ने अपनी अफ़ज़लियत के लिए कहा कि मुझ में तीन फ़र्ज़ नमाज़ें हैं और तुझ में दो, और मुझ में जुमा के दिन दुआ कबूल होने की एक घड़ी है जिस में आदमी जो मांगता है वह मिलता है (यह सहीह और मशहूर हदीस है।) और मेरे अन्दर रमज़ानुल-मुबारक के रोज़े रखे जाते हैं, तू लोगों के लिए सोने और ग़फ़लत का ज़रिया है और मेरे साथ बेदारी और चोकन्नापन है और मुझ में हरकत है और हरकत में बरकत है. और मुझ में आफ़ताब निकलता है जो सारी दुनिया को रोशन कर देता है.
रात ने कहा कि अगर तू अपने आफ़ताब (सूर्य) पर फ़ख़र करता है तो मेरे आफ़ताब अल्लाह वालों के दिल हैं। तहज्जुद वाले और अल्लाह की हिकमतों में ग़ौर करने वालों के दिल हैं। तू उन आशिक़ों के शराब तक कहां पहोंच सकता है जो ख़ल्वत (एकांतवास) के वक़्त में मेरे साथ होते हैं। तू मेराज की रात का क्या मुक़ाबला कर सकता है। तू अल्लाह जल्ल शानुहू के पाक इर्शाद का क्या जवाब देगा जो उस ने अपने पाक रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम से फ़रमाया:
“وَمِنَ الَّیۡلِ فَتَهَجَّدۡ بِه نَافِلَۃً لَّکَ”
कि रात को तहज्जुद पढ़िए जो बतोरे नाफ़िला (नफ़ल नमाज़ के तौर पर) है आप के लिए। अल्लाह ने मुझे तुझ से पहले पैदा किया। मेरे अंदर शबे-क़द्र है, जिस में मालिक की नामालूम क्या क्या बख़्शीश होती हैं। अल्लाह का पाक इर्शाद है कि वह हर रात के आखिरी हिस्से में यूं इर्शाद फ़रमाता है: कोई है मांगने वाला जिस को दुं? कोई है तौबा करने वाला जिस की तौबा क़बूल करूं? क्या तुझे अल्लाह के इस पाक इर्शाद की ख़बर नहीं:
“یٰۤاَیُّها الۡمُزَّمِّلُ ۙ﴿۱﴾ قُمِ الَّیۡلَ اِلَّا قَلِیۡلًا ۙ﴿۲﴾”
क्या तुझे अल्लाह के उस इर्शाद की ख़बर नहीं कि जिस में अल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया:
“سُبۡحٰنَ الَّذِیۡۤ اَسۡرٰی بِعَبۡدِهٖ لَیۡلًا مِّنَ الۡمَسۡجِدِ الۡحَرَامِ اِلَی الۡمَسۡجِدِ الۡاَقۡصَا”
पाक है वह ज़ात जो रात को ले गया अपने बंदे को मस्जिदे-हराम से मस्जिदे-अक़सा तक। (फ़ज़ाईले दुरूद-शरीफ , पेज नं- १९२)
يَا رَبِّ صَلِّ وَسَلِّم دَائِمًا أَبَدًا عَلَى حَبِيبِكَ خَيرِ الْخَلْقِ كُلِّهِمِ
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