वालिदैन के इन्तिक़ाल के बाद उनकी आझाकारिता का तरीक़ा

शेख़ुल हदीष हज़रत मौलाना मुहम्मद ज़करिय्या साहब (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः

“जिस किसी ने अपने माता-पिता की ज़िंदगी में उन की सेवा तथा आझा का पालन न किया हो बाद में उन के इन्तिक़ाल के बाद उस की तलाफ़ी (प्रायश्र्वित) की शकल भी हदीष से षाबित है. वह यह के एसा शख़्स अपने माता-पिता के लिए मग़फ़िरत की दुआ तथा इसाले षवाब और उन के मिलने वालों के साथ अच्छा व्यव्हार करे, जिस से वह फिर फ़रमांबरदारों (अझाकरियों) में शामिल हो जाता है.” (मलफ़ूज़ात हज़रत शैख़(रह.), पेज नं-३९)

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