दोस्ती और दुश्मनी में ऐअतेदाल(संयम) की ज़रूरत

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः

हद से गुज़र कर हर चीज़ मज़मूम(निंदा के लाईक़) है. हदीष में तालीम (शिक्षा) है के हद से गुज़र कर दोस्ती मत करो मुमकिन है के किसी दीन नफ़रत हो जावे. इसी तरह हद से गुज़र कर दुश्मनी मत करो मुमकिन है के फिर तअल्लुक़ात(रिश्ते) दोस्ती के हो जाऐं तो उस समय शरमिन्दगी होगी के हम ने उस व्यक्ति के साथ क्युं दुश्मनी की थी. यदी इस्लामी तालीम (शिक्षा) में हर तरह की राहत ही है. कैसी पाकीज़ा और अजीब तालीम (शिक्षा) है. (मलफ़ूज़ाते हकीमुल उम्मत, जिल्द नं-८, पेज नं-३११)

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