
हज़रत सईद बिन-आमिर रह़िमहुल्लाह की सख़ावत
हज़रत सईद बिन-आमिर रह़िमहुल्लाह हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु की जानिब से ह़िम्स के हाकिम (गवर्नर) थे। अहले-ह़िम्स ने हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु से इनकी मुतअद्दद शिकायतें कीं और इनके माज़ूल करने की दख़्र्वास्त की।
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु को हक तआला शानुहू ने फिरासत का ख़ास हिस्सा अता फरमाया था जिसकी वजह से मर्दुम-शनासी में खास दखल था, और उसका हज़ारों मर्तबा तजुर्बा भी हो चुका था। इस पर ताज्जुब फरमाया कि मैं ने तो बहुत बेहतर समझ कर तजवीज़ किया था और इसकी दुआ की थी कि या अल्लाह, मेरी फिरासत को लोगों के बारे में ज़ायल न फर्मा कि इससे तो सारे ही महकमे के आदमियों में ना-अहलों के घुस जाने का अंदेशा है।
इसके बाद हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने हज़रत सईद रज़ियल्लाहु अ़न्हु को तलब किया और शिकायत करने वालों को भी बुलाया और उनसे दर्याफ्त फ़रमाया कि तुम लोगों को इनसे क्या क्या शिकायतें हैं? उन्होनें तीन शिकायतें की थीं।
एक यह कि दिन में बहुत देर से घर से निकलते हैं (अदालत में देर से पहुँचते हैं) दूसरे रात को अगर कोई इनके पास जाये तो उस वक़्त उसकी शिकायत नहीं सुनते, तीसरे हर महीने में एक दिन की तातील (छुट्टी) करते हैं।
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने दोनों फरीक़ को सामने खड़ा किया और फ़रमाया कि नम्बरवार मुतालबात करो ताकि हर शिकायत का अलाहिदा-अलाहिदा जवाब लिया जाये।
उन लोगों ने कहा कि सुबह को देर में घर से निकलते हैं। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने उनसे जवाब तलब किया, उन्होंने अर्ज़ किया कि मेरी बीवी तन्हा काम करने वाली है, मैं आटा गूधंता हूँ रोटी पकाता हूँ, जब रोटी तैयार हो जाती है तो खाने से फारिग होकर वुज़ू करके बाहर चला आता हूँ।
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया, दूसरा मुतालबा क्या है? उन्होंने अर्ज़ किया कि रात को काम नहीं करते, कोई जाता है तो उसकी हाजत पूरी नहीं होती। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया इसका क्या जवाब तुम्हारे पास है? हज़रत सईद रह़िमहुल्लाह ने अर्ज़ किया, मेरा दिल नहीं चाहता कि इसका इज़्हार करूं। मैंने दिन और रात को तक़्सीम कर रखा है, दिन मख़्लूक का और रात ख़ालिक की। मैंने रात सारी की सारी अपने मौला को दे रखी है।
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया कि तीसरा मुतालबा क्या है? उन्हों ने अर्ज़ किया कि महीने में एक दिन तातील (छुट्टी) करते हैं। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया: इसका क्या जवाब है? हज़रत सईद रह़िमहुल्लाह ने अर्ज़ किया कि मेरे पास कोई ख़ादिम नहीं है, मैं महीने में एक दिन कपड़े खुद ही धोता हूँ, उनको खुश्क करके पहनने में शाम हो जाती है।
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने हक तअ़ाला शानुहू का शुक्र अदा किया कि मेरी फिरासत ग़लत न हुई। इसके बाद उन लोगों से फ़रमाया कि तुम अपने अमीर की क़दर करो।
उन सबके जाने के बाद हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने हज़रत सईद रह़िमहुल्लाह के पास एक हज़ार दीनार (अशर्फियां) भेजीं कि इनको अपनी ज़रूरियात में खर्च करें। उनकी बीवी ने कहा, अल्लाह का शुक्र है कि उसने बहुत सी ज़रूरियात का इंतिज़ाम फ़रमा दिया। अब तुम्हें खुद घर के कारोबार करने की एहतियाज न रहेगी, एक खादिम भी इसमें ख़रीदा जा सकता है और दूसरी ज़रूरियात भी पूरी की जा सकती हैं।
हज़रत सईद रह़िमहुल्लाह ने फरमाया कि यहां हमसे भी ज़्यादा मुहताज और ज़रूरत मंद लोग मौजूद हैं, इनको उन लोगों पर खर्च न कर दें? बीवी ने इसको खुशी से क़बूल फरमा लिया।
उन्हों ने उसमें से छोटी छोटी थैलियां बनाकर एक फलां यतीम को, एक फ़लां को, गरज़ बहुत सा हिस्सा तो उसी वक़्त तक़्सीम कर दिया, कुछ बचा था, उसको बीवी के हवाले कर दिया कि थोड़ा थोड़ा खर्च करती रहेगी।
बीवी ने कहा कि बची हुई रकम से एक गुलाम ख़रीद लेंगे, घर के कारोबार में तुम्हें सहूलत हो जायेगी, (फरमाने लगे) अन्करीब तुझसे ज़्यादा हाजत वाले तेरे पास आयेंगे।
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