मोहब्बत का बाग (किस्त: 81)

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बुलंद मकाम

अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त के तमाम बंदों में से नबियों (पैग़ंबरों) का इस्लाम सबसे ऊंचे और सबसे बेहतर दर्जे का था। अल्लाह तआला ने उन्हें इन्सानियत की रहनुमाई (मार्गदर्शन) के लिए चुना था और उन्हें दुनिया में इस मकसद के लिए भेजा कि वे लोगों को सिखाएं कि कैसे एक सच्चा और फर्मांबर्दार मुसलमान बने और कैसे अपनी ज़िंदगी गुज़ारे।

हर नबी मुकम्मल इस्लाम का अमली नमूना था; लेकिन तमाम नबियों में से अल्लाह तआला ने हमारे नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को ऐसा इस्लाम अता किया जो सब नबियों के इस्लाम से आला और अफ़ज़ल (बेहतर) था।

इसीलिए तमाम नबियों में हज़रत मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम सबसे अफ़ज़ल रसूल और नबी हैं और वे अल्लाह के सबसे ज़्यादा महबूब (पसंदीदा) हैं। हज़रत नबी सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम आखिरी नबी हैं, उन्हीं पर नबियों का सिलसिला खत्म हो गया और वे तमाम नबियों और रसूलों के इमाम (लीडर) हैं।

हमारे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के दर्जे के बाद हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का दर्जा आता है।

अल्लामा सुयूती रह़िमहुल्लाह ने ज़िक्र किया है कि तमाम उलमा-ए-किराम का इस बात पर इत्तेफाक (सहमति) है कि हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का इस्लाम, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के बाद सबसे अफ़ज़ल था।

उलमा-ए-किराम फरमाते हैं कि हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के बाद या तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम हैं या हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम या हज़रत नूह अलैहिस्सलाम। इस बात पर कोई एक राय नहीं है कि दर्जे के हिसाब से इन तीनों में तीसरे नंबर पर कौन है। बहरहाल, बाकी तमाम नबियों का मकाम इन तीनों नबियों (हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम, हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम, हज़रत नूह अलैहिस्सलाम) के बाद आता है।

कुरान-शरीफ की बहुत सी आयतों में अल्लाह रब्बुल-इज्ज़त ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की तारीफ की है और उनके खूबसूरत सिफात बयान किए हैं।

नीचे उनकी कुछ खास सिफात (खूबियों) का ज़िक्र है, जिन का कुराने-करीम में ज़िक्र किया गया है:

अकेले ही एक पूरी ‘उम्मत’ के बराबर

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अकेले ही एक पूरी उम्मत के बराबर खूबियां रखते थे और वे हमेशा अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त के हुक्म को मानने वाले रहे।

अल्लाह त’आला फरमाता है:

إِنَّ إِبْرَاهِيمَ كَانَ أُمَّةً قَانِتًا لِّلَّهِ حَنِيفًا وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِكِينَ

“बेशक हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम एक उम्मत थे (यानी एक ऐसे मुकम्मल लीडर जिनमें पूरी उम्मत की खूबियां थीं)। वे अल्लाह के फर्मांबर्दार थे। पूरी तरह हक की तरफ माइल थे और मुशरिकों (अल्लाह के साथ किसी को शरीक करने वालों) में से नहीं थे।”(सूरह नहल: 120)

इस आयत में अल्लाह त’आला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की एक सिफत (खूबी) की तारीफ फ़रमाई है वह यह है के वे ‘हनीफ’ थे। ‘हनीफ’ से मुराद वह शख़्स है जो हमेशा फर्मांबर्दारी और इताअत पर डटा रहे और बातिल की तरफ ज़रा भी माइल न हो।

अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने वाले

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त ने दीन और दुनिया की जो भी बरकतें दी थीं, वे हमेशा उनका शुक्र अदा करते थे।

अल्लाह तआला फरमाता है:

شَاكِرًا لِّأَنْعُمِهِ ۚ اجْتَبَاهُ وَهَدَاهُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ‎﴿١٢١﴾

“(वे) अल्लाह तआला की नेमतों के शुक्रगुज़ार थे। अल्लाह तआला ने उन्हें चुन लिया और सीधे रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई फरमाई।” (सूरह नहल: 121)

दुनिया और आखिरत में कामयाबी

अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर दुनिया में भी खास फज़ल फ़रमाया और भलाई अता की। नीज़ अल्लाह तआला ने फैसला फरमाया कि आखिरत में भी वे नेक लोगों में शामिल होंगे।

अल्लाह तआला फ़रमाते है:

وَآتَيْنَاهُ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَإِنَّهُ فِي الْآخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِحِينَ ‎﴿١٢٢﴾

“हमने उन्हें दुनिया में भलाई अता की और बेशक वे आखिरत में नेक लोगों में से होंगे।” (सूरह नहल: 122)

हर इम्तिहान में ‘टोपर’ और ‘इमाम’ का मकाम

अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को कई मुश्किल इम्तिहानों और आज़माइशों से गुज़ारा और वे हर इम्तिहान में पूरी तरह कामयाब रहे। चुनांचे अल्लाह तआला ने उन्हें बुलंद मकाम और इमामत (लीडरशिप) का मन्सब अता किया।

अल्लाह तआला फरमाते हैं:

وَإِذِ ابْتَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ رَبُّهُ بِكَلِمَاتٍ فَأَتَمَّهُنَّ ۖ قَالَ إِنِّي جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ إِمَامًا ۖ

“और (याद करो) जब इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) को उनके रब ने चंद बातों से इम्तिहान लिया, तो उन्होंने उन सबको पूरा कर दिखाया। अल्लाह ने फरमाया: मैं तुम्हें लोगों का इमाम बनाने वाला हूं।” (सूरह बक़रह: 124)

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