
इयादते-मरीज़ के फज़ाइल
सत्तर हज़ार फ़रिश्तों की दुआ का हुसूल
हज़रत अली रद़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़र्माया: “जो शख़्स सुब्ह को किसी बिमार आदमी की इयादत करे, उस के लिए सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक अल्लाह तआला से रहमत की दुआ करेंगे और जो शख़्स शाम को किसी बिमार आदमी की इयादत करे , उसके लिए सत्तर हज़ार फरिश्ते सुब्ह तक अल्लाह तआला से रहमत की दुआ करेंगे और उस को जन्नत में एक बाग मिलेगा।”
जन्नत में महल की तामीर
हज़रत अबू-हुरैरह रद़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़र्माया कि “जब कोई शख्स किसी बिमार आदमी की इयादत करता है तो आसमान से एक फरिश्ता पुकारता है कि आराम-व-सुकून से रहो। तुम्हारा चलना कितना अच्छा है (यानी अपने भाई से मुलाक़ात और उस की ख़बरगिरी के लिए) और (इस अमल से) तुमने अपने लिए जन्नत में एक महल बना लिया है।”
अल्लाह की रज़ा का हुसूल
हज़रत अबू-हुरैरह रद़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़र्माया कि क़यामत के दिन अल्लाह तआला फ़रमाएंगे: ”ऐ आदम के बेटे! मैं बीमार था, मगर तूने मेरी इयादत नहीं की।” वह शख़्स जवाब देगा: ”ऐ अल्लाह! मैं आपकी इयादत कैसे करता, जबकि आप तो दोनों जहानों के परवरदिगार हैं (और बीमारी से पाक हैं)?” अल्लाह तआला फ़रमाएंगे: ”क्या तुझे मालूम नहीं कि मेरा फ़लां बंदा बीमार था और तूने उसकी इयादत नहीं की? क्या तुझे मालूम नहीं था कि अगर तू उसकी इयादत करता, तो तू मुझे उसके पास पाता?” (यानी तू मेरे सवाब और रज़ा को इस अमल के ज़रिए हासिल करता)
जहन्नम से सत्तर साल के डिस्टेंस की दूरी
हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जो शख्स अच्छी तरह वुज़ू करे (यानी वुज़ू के सभी सुन्नत और मुस्तह़ब चीज़ो का ख़्याल रखे) और सवाब की नीयत से अपने बीमार मुसलमान भाई की मिज़ाजपुर्सी (इयादत) करने जाए, तो उसे जहन्नम से सत्तर साल के सफ़र के बराबर दूर कर दिया जाएगा।”
जन्नत के बाग में रहना
हज़रत सौबान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जब कोई शख्स किसी बीमार की मिज़ाजपुर्सी करता है, तो वह वापस आने तक जन्नत के बागों में रहता है।”
अल्लाह की रहमत में डूब जाना
हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जब कोई शख्स किसी बीमार का हाल पूछने जाता है, तो वह अल्लाह की रहमत में दाखिल हो जाता है। और जब वह बीमार के पास बैठ जाता है, तो वह अल्लाह की रहमत में पूरी तरह डूब जाता है।”
जन्नती लोगों की एक खूबी
हज़रत अबू-हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि एक मौके पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने सहाबा-ए-किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम से दर्याफ़्त किया: “आज तुम में से किसने रोज़ा रखा है?” हज़रत अबू-बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया: “मैं आज रो़ज़े से हूं।” फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने दर्याफ़्त फ़रमाया: “आज तुम में से किसने किसी बीमार की मिज़ाजपुर्सी (‘इयादत) की है?” हज़रत अबू-बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया: “मैंने की है।” आप सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फिर पूछा: “आज किसने किसी जनाज़े में शिरकत की है?” हज़रत अबू-बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया: “मैंने की है।” फिर आपने पूछा: “आज किसने किसी गरीब को खाना खिलाया है?” हज़रत अबू-बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया: “मैंने खिलाया है।” इसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जिस शख्स में ये सारी खूबियां जमा होंगी, वह ज़रूर जन्नत में दाखिल होगा।” (सहीह मुस्लिम)
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