
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः
“कुफ़र जड़ है तमाम अख़लाक़े रज़ीला (घटिया अख़लाक़) की और इस्लाम जड़ है तमाम अख़लाक़े हमीदा (अच्छे अख़लाक़) की, इस लिए कुफ़र के होते हुए इत्तिफ़ाक़ होना (सहमत होना) अत्यंत अजीब (ताज्जुब) है और इस्लाम के होते हुए ना इत्तिफ़ाक़ी (असहमत होना) होना अजब (आश्चर्यजनक) है. इन दोनों का सबब कुछ कारण होते हैं.” (मलफ़ूज़ाते हकीमुल उम्मत. जिल्द नं-७, पेज नं-१९४)
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