हज़रत मौलाना मुहम्मद इलियास साहब (र.ह.) ने एक बार अपने तलबा से इर्शाद फरमाया: तूम अपनी कदरो कीमत पहचानो। दुनिया के सारे खजाने भी तुम्हारे सामने कुछ नहीं। अल्लाह के सिवा कोई तुम्हारी कीमत नहीं लगा सकता। तुम पैगंबर (उ.ल.) के नाइबिन हो, जो पूरी दुनिया से कह देते हो: …
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चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ में क़ादा-ए-अख़ीरा भूल जाना
सवाल: एक आदमी चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहा था। चौथी रकात अदा करने के बाद वह क़ादा-ए-अख़ीरा (दूसरे अत्तहियात) के लिए नहीं बैठा; बल्कि भूल कर पाँचवीं रकात के लिए खड़ा हो गया। फिर उसने पाँचवीं रकात में रुकू और सजदा भी कर लिया, उसके बाद वह तशहुद (अत्तहिय्यात) …
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