हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का सदक़ा की खजूर के ख़ौफ़ से तमाम रात जागना एक बार नबी-ए-करिम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम तमाम रात जागते रहे और करवतें बदलते रहे। अज़वाज-ए-मुतह्हरात में से किसी ने उरज किया: ‘या रसूलल्लाह! आज नींद नहीं आती?’ इरशाद फरमाया कि एक खजूर परी हुई थी, मैं …
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बाग-ए-मोहब्बत (किस्त-८०)
इस्लाम की करेंसी इस दुनिया की ज़िंदगी में इन्सान की एक बुनियादी फिक्र ‘माल’ हासिल करना है। इसकी वजह यह है कि इन्सान माल को इस दुनिया की करेंसी समझता है और वह यह भी जानता है कि वह इस माल के ज़रिए कितने फायदे हासिल कर सकता है। इन्सान …
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