Monthly Archives: April 2026

शोहरत के मुताल्लिक़ मज़ाक़

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़मतुल्लाहि ‘अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: उम्मत की ख़िदमत और उनके दीन की हिफ़ाज़त करना चाहिए। अपनी शोहरत में क्या रखा है? शोहरत के मुताल्लिक़ तो बस यह मज़ाक़ (रग़बत,चाहत) चाहिए कि न ज़िंदगी में किसी को ख़बर हो कि फ़ुलां शख़्स भी दुनिया …

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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु का अपने पड़ोसियों के साथ हुस्ने-सुलूक (अच्छा व्यवहार)

عن عيسى بن عميلة رحمه الله أنه قال: أخبرني من رأى أبا ذر يحلب غنيمة له، فيبدأ بجيرانه وأضيافه قبل نفسه. (من سير أعلام النبلاء ٣/٣٩٩) ईसा बिन-उमैलह रह़िमहुल्लाह ने एक ऐसे शख़्स से नक़ल किया है जिन्होंने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु का अपने पड़ोसियों और मेहमानों के साथ हुस्ने-सुलूक …

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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु की सच्चाई के बारे में रसूले-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की गवाही

قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: ما أظلت الخضراء (أي: السماء) ولا أقلت الغبراء (أي: الأرض) أصدق من أبي ذر. (سنن الترمذي، الرقم: ٣٨٠١) एक मौका पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: आसमान के नीचे और ज़मीन के ऊपर हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से ज़्यादा कोई सच्चा नहीं …

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अज़ान सुन कर दुरूद-शरीफ़ पढ़ना

लोगों ने ख़ल्लाद बिन कषीर की बीवी से उस की वजह पूछी, तो उन्होंने जवाब दिया के उस का मामूल (नियम) था के हर जुम्आ को निम्नलिखित दुरूद को एक हज़ार मर्तबा पढ़ते थेः

اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ...

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तहज्जुद की नमाज़ के लिये बेदार होने के वक़्त दुरूद-शरीफ़ पढ़ना

हज़रत जाबिर बिन समुरा (रज़ि.) से रिवायत है के नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के बेशक में मक्का मुकर्रमा के अन्दर इस पत्थर को पेहचानता हुं जो मुझे नुबुव्वत से पेहले सलाम किया करता था. बेशक में इस को अभी भी पेहचानता हुं....

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फ़र्ज़ नमाज़़ों के बाद दुरूद-शरीफ़ पढ़ना

हज़रत अनस (रज़ि.) के दिल में रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इतनी ज़्यादा मोहब्बत थी के उन्होंने अपने आप को नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के बग़ैर इस दुन्या में रेहने के क़ाबिल नहीं समझा...

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दाढ़ी के मस्अले में हज़रत मदनी रह़मतुल्लाहि अलैहि का रिआयत न करना

शैख़ुल-हदीस हज़रत मौलाना मुहम्मद ज़करिय्या रह़मतुल्लाहि अलैहि ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: हज़रत मदनी रह़िमहुल्लाह आख़िर उम्र में दाढ़ी के मस्अले पर बड़ी शिद्दत से तंबीह फ़रमाया करते थे। मुझसे हज़रत के बाज़ जेल के साथियों ने कहा कि एक आपके अख़लाक़ हैं, एक उनके अख़लाक़ कि वो हज़रत दाढ़ी …

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नमाज़ में दुरूद शरीफ़

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से रिवायत है के ‎‎“रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने हमें तशह्हुद की दुआ (अत तहिय्यातुत ‎तय्यिबातुज़ ज़ाकियातु अख़ीर तक) सिखाते थे (और उस के बाद फ़रमाते के तशह्हुद की ‎दुआ पढ़ने के बाद) दुरूद शरीफ़ पढ़ना चाहिए.”...

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