सवाल: अगर कोई क़ुरआन मजीद की तिलावत करे और वह सज्दा की आयत पढ़े, तो वह किस वक़्त सज्दा-ए-तिलावत कर सकता है और किस वक़्त सज्दा-ए-तिलावत नहीं कर सकता है? जवाब: सज्दा-ए-तिलावत मकरूह वक़्त में करना मम्नू (मना) है। ये तीन वक़्त हैं: ज़वाल का वक़्त (जब सूरज ठीक सर …
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इयादते-मरीज़ की सुन्नतें और आदाब – २
इयादते-मरीज़ के फज़ाइल सत्तर हज़ार फ़रिश्तों की दुआ का हुसूल हज़रत अली रद़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़र्माया: “जो शख़्स सुब्ह को किसी बिमार आदमी की इयादत करे, उस के लिए सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक अल्लाह तआला से रहमत की दुआ करेंगे और …
اور پڑھوहज – ज़िन्दगी का एक अहम सफर
फज़ाइले-आमाल – ३५
सहाबा किराम रद़ियल्लाहु अन्हुम के तक़्वा के बयान में हज़रात सहाबा-ए-किराम रद़ियल्लाहु अन्हुम की हर आदत, हर खसलत इस क़ाबिल है कि उसको चुना जाए और उसका इत्तिबा किया जाए और क्यों न हो कि अल्लाह जल्ल शानुहू ने अपने लाडले और महबूब रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की मुसाहबत के …
اور پڑھوदुरूद शरीफ़ ग़ुर्बत दूर करने का ज़रीआ
हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के एक मर्तबा नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने फ़रमाया के मुझे किसी आदमी के माल से इतना नफ़ा नहीं हुवा जितना मुझे हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.) के माल से नफ़ा हुवा...
اور پڑھوग़ुस्ल में नाफ़ के अंदरूनी हिस्से को धोना
सवाल: ग़ुस्ल के दौरान मैं अपनी नाफ़ के अंदरूनी हिस्से को उंगली से धोना भूल गया। क्या मेरा ग़ुस्ल सही है, या मुझे दोबारा ग़ुस्ल करना पड़ेगा? क्या ग़ुस्ल में नाफ़ के अंदरूनी हिस्से को रगड़ना ज़रूरी है? जवाब: ग़ुस्ल के सही होने के लिए नाफ़ के अंदर उंगली डालना …
اور پڑھوहज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु – हब्शियों में सबसे पहले मुसलमान
عن سيدنا أنس رضي الله عنه أنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: السباق (أقوامهم إلى الإسلام) أربعة: أنا سابق العرب (جئتنهم بالإسلام)، وسلمان سابق الفرس (إلى الإسلام)، وبلال سابق الحبشة (إلى الإسلام)، وصهيب سابق الروم (إلى الإسلام) (المستدرك، الرقم: ٥٢٤٣) हज़रत अनस रद़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं …
اور پڑھوवुज़ू में पैरों की उंगलियों का खिलाल करने का तरीक़ा
सवाल: पैरों की उंगलियों का खिलाल करने का सही तरीक़ा क्या है? जवाब: बाएं हाथ की छोटी उंगली को पैरों की उंगलियों के दरमियान दाखिल करें। दाएं पैर की छोटी उंगली से खिलाल शुरू करें और बाएं पैर की छोटी उंगली पर ख़त्म करें। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. …
اور پڑھوएक मोमिन की ज़िंदगी पर नमाज़ का बड़ा असर
हज़रत मौलाना मुहम्मद इल्यास साहिब रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: हमारे नज़दीक इस्लाह की तरतीब यूं है कि (कलिमा-ए-तय्यिबा के ज़रिए ईमानी मुआहदा की तजदीद के बाद) सबसे पहले नमाज़ों की दुरुस्ती और तकमील (पूरा करने) की फिक्र की जाए। नमाज़ की बरकात बाकी पूरी ज़िंदगी को सुधार देंगी। …
اور پڑھوसो (१००) हाजतो का पूरा करना
हजीर जाबिर (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जो व्यक्ति मुझ पर हर दिन सो (१००) बार दुरूद भेजता है, अल्लाह तआला उस की सो (१००) ज़रूरतें पूरी करेंगेः सत्तर (७०) ज़रूरतें उस के आख़िरत के जीवन के बारे में और तीस (३०) ज़रूरतें उस की दुनयवी जीवन से संबंधित.”...
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