सवाल: अगर कोई आदमी सिर्फ फर्ज़ नमाज़ पढ़े और सुन्नते-ए-मुअकद्दह को पढ़ना छोड़ दे तो उसका क्या हुक्म है? क्या सुन्नते-ए-मुअकद्दह को छोड़कर सिर्फ फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना गुनाह है? जवाब: अगर कोई सिर्फ फ़र्ज़ नमाज़ पर बस करे और वाजिब नमाज़ (वित्र नमाज़) और सुन्नते-ए-मुअकद्दह न पढ़े तो गुनहगार होगा। …
और पढ़ो »Monthly Archives: November 2025
ज़कात की सुन्नतें और आदाब – १
ज़कात इस्लाम के पांच बुनियादी अरकान में से एक अहम रुकन है। ज़कात सन २ हिजरी में रमज़ान के रोज़े से पेहले फर्ज़ हूई थी। कुराने-करीम में बहुत सी आयत और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की बहुत सी हदीस में ज़कात अदा करने की फ़ज़ीलत और अज़ीम सवाब बयान किया …
और पढ़ो »दुरूद शरीफ़ रिज़्क़ में बरकत का ज़रीआ
हज़रत सहल बिन सअद (रज़ि) फ़रमाते हैं के एक मर्तबा एक सहाबी नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़िदमत में हाज़िर हुवे और आप से ग़रीबी तथा धन के अभाव की शिकायत. तो नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने उन से फ़रमाया के...
और पढ़ो »सहाबा-ए-किराम रद़ियल्लाहु अन्हुम के लिये हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाह अन्हु की दुआ
ذات مرة، طلب بعض الناس من سيدنا سعيد بن زيد رضي الله عنه أن يسبّ بعض الصحابة رضي الله عنهم، فقال سيدنا سعيد رضي الله عنه: تأمروني بسب إخواني، بل صلى الله عليهم (خصهم برحمته)، ثم تكلم عن فضلهم وبكى (المسند للشاشي، الرقم: ١٩٣) एक मर्तबा कुछ लोगो ने हज़रत …
और पढ़ो »कर्ज़ की अदायगी में सहूलत का नुस्खा
शेखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक बात कहता हूं, अब उसको चाहे तुम मेरी नसीहत समझो, वसीयत समझो या तजुर्बा। वह यह कि अगर किसी से कर्ज़ लो तो देने की निय्यत खालिस रखो (कि उसको अदा करना ही है) और फिर वक़्त पर …
और पढ़ो »बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना
सवाल: क्या बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है? जवाब: बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है; मगर मस्जिद के आदाब में से है कि आदमी मस्जिद में बा-वुज़ू दाखिल हो और जब तक मस्जिद में रहे बा-वुज़ू रहे। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. وَمَن …
और पढ़ो »मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – १
मरीज से इयादत दीने-इस्लाम इस बात का हुक्म देता है कि इन्सान अल्लाह तआला के हुकूक और उसके बंदों के हुकूक को पूरा करे। बंदों के जो हुकूक इन्सान पर लाज़िम हैं, उनकी दो किस्म हैं: पहली किस्म = जो हर एक पर इन्फिरादी तौर पर लाज़िम हैं। उदाहरण के …
और पढ़ो »सजदे में दुआ करना
सवाल: सुन्नत और फ़र्ज़ नमाज़ों के सजदे में कौन सी दुआएं पढ़ सकता हूं? और, क्या नफ़्ल नमाज़ के सजदे में अंग्रेज़ी में दुआ मांग सकता हूं? जवाब: १. सुन्नत और फ़र्ज़ नमाज़ों के सजदे में आप वो तमाम दुआएं जो क़ुरान और हदीस में पाई जाती है अरबी ज़बान …
और पढ़ो »रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम का मुबारक नाम सुन कर दुरूद पढ़ने का षवाब
हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जिस व्यक्ति के सामने मेरा वर्णन किया जाए, उस को मुझ पर दुरूद भेजना चाहिए, इसलिए के जो मुझ पर एक बार दुरूद भेजता है, अल्लाह तआला उस पर दस बार दुरूद (रहमतें) भेजते हैं.”...
और पढ़ो »हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाहु अन्हु का बुलंद मक़ाम
قال سعيد بن جبير رحمه الله: كان مقام أبي بكر وعمر وعثمان وعليّ وسعد وسعيد وطلحة والزّبير وعبد الرّحمن بن عوف رضي الله عنهم مع النّبي صلّى اللَّه عليه وسلم واحدًا، كانوا أمامه في القتال (يدافعون عنه صلى الله عليه وسلم ويحفظونه)، وخلفه (مباشرة) في الصلاة (أي: في الصف المتقدم) (الإصابة ٣/٨٧) …
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