Monthly Archives: September 2025

कोहे हिरा का खुशी से झूमना

ذات مرة، صعد رسول الله صلى الله عليه وسلم جبل حراء فتحرك (الجبل ورجف)، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: اثبت حراء، فما عليك إلا نبي، أو صديق، أو شهيد وعدهم رسول الله صلى الله عليه وسلم: أبو بكر، وعمر، وعثمان، وعلي، وطلحة، والزبير، وسعد، وابن عوف، وسعيد بن …

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फज़ाइले-सदकात – २५

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रद़ियल्लाह अन्हुमा की सखावत अबान बिन-उस्मान रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि एक शख़्स ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रद़ियल्लाहु अन्हुमा को परेशान और ज़लील करने के लिए यह हरकत की कि कुरैश के सरदारों के पास जाकर यह कहा कि इब्ने-अब्बास (रद़ियल्लाहु अन्हुमा) ने कल सुबह आपकी …

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एक मर्द और पुरुष किस उंगली में अंगूठी पहने

सवाल: क्या मैं अपने बाएं हाथ की शहादत वाली उंगली या दरम्यानी उंगली में अंगूठी पहन सकता हूं? जवाब: मर्द के लिये सिर्फ एक चांदी की अंगूठी पहनना जाईज़ है, जो एक मिस्काल से ज़्यादा न हो (यानी 4.374 ग्राम से ज़्यादा न हो)। उन्हें चांदी की अंगूठी अपनी ख़िन्सर …

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दुरूद-शरीफ़ पढ़ने वाले के लिये नबी सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की सिफारिश

عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال من قال اللهم صل على محمد وعلى آل محمد كما صليت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم وبارك على محمد وعلى آل محمد كما باركت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم وترحم على محمد وعلى آل محمد كما ترحمت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم شهدت له يوم القيامة بشهادة وشفعت له بشفاعة أخرجه البخاري في الأدب المفرد وأبو جعفر الطبري في تهذيبه والعقيلي...

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हज़रत सईद बिन ज़ैद (रद़ियल्लाहु अन्हु) के लिए जन्नत की खुशखबरी

एक मर्तबा रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) हज़रत सईद बिन ज़ैद (रद़ियल्लाहु अन्हु) के बारे में इर्शाद फ़रमाया: سعيد في الجنة (أي: هو ممن بشّر بالجنة في الدنيا) (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧٤٧) सईद जन्नत में होंगे (यानि वह उन लोगों में से हैं जिन्हें इस दुनिया में जन्नत की खुशखबरी दी …

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फज़ाइले-आमाल – ३१

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम का सहाबा रद़ियल्लाहु अन्हुम से दो शख्सों के बारे में सवाल नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की ख़िदमत में कुछ लोग हाजिर थे कि एक शख्स सामने से गुज़रा। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने दर्याफ़्त फ़रमाया कि तुम लोगों की इस शख्स के बारे में क्या …

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क़ुरान-मजीद खत्म करने के बाद सूरह-बक़रह की पहेली पांच आयतें पढना

सवाल – क्या क़ुरान-मजीद पूरा करने के बाद सूरह-बक़रह की पहली पांच आयतें पढ़ना दुरूस्त है? उत्तर: हां, यह दुरूस्त है। हदीस-शरीफ़ में आया है कि जब कोई शख़्स क़ुराने-मजीद खत्म करते हुए सूरह-नास तक पहुँच जाए, तो उसे क़ुराने-करीम फिर से शुरू करना चाहिए और सूरह-फ़ातिहा और सूरह-बक़रह की …

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मुअक्कद-सुन्नत को मस्जिद में पढ़ना

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह़िमहुल्लाह) ने एक बार इर्शाद फ़रमाया: फर्ज़ के अलावा जो नमाज़ है, उन के मुताल्लिक (बारे में), सलफ़ (पेहले बुज़ुर्गो) में यही मामूल था कि घर पर पढ़ते थे, और फी-नफ्सिही इसमें फ़ज़ीलत है; मगर एक जमाअत ऐसी पैदा हो गई कि वो मुअक्कद-नमाज़ की …

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हज़रत अब्दुर्रह़मान बिन औफ़ रद़ियल्लाहु अन्हु की सखावत

أوصى سيدنا عبد الرحمن بن عوف رضي الله عنه لكل من شهد بدرا بأربعمائة دينار، فكانوا مائة رجل (كان مائة من أهل بدر أحياء عند وفاته). وكذلك أوصى بخمسين ألف دينار فِي سبيل اللّه. (من أسد الغابة ٣/٣٨٠) हज़रत अब्दुर्रह़मान बिन औफ़ (रद़ियल्लाहु अन्हु) ने अपनी वफ़ात से पहले वसीयत …

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