Monthly Archives: February 2022

नमाज़ की सुन्नतें और आदाब – ९

“नबिए करीम ‎‎(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के दौर में औरतों को हिदायत दी ‎गई थी के वह नमाज़ के दौरान अपने अंगो को जितना ज़्यादा हो ‎सके मिला कर रखें.‎”...

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क़यामत की अलामात (संकेत)- दूसरा प्रकरण

उलमाए किराम ने क़यामत की अलामतों को दो हिस्सों में तक़सीम किया हैः बड़ी अलामतें और छोटी अलामतें. छोटी अलामतों में सब से पेहली अलामत नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इस दुनिया से रिहलत (जाना) है और बड़ी अलामतों में सब से पेहली अलामत इमाम महदी (अलै.) का ज़ुहूर (ज़ाहिर होना) है...

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मोहब्बत का बग़ीचा (बाईसवां प्रकरण)‎

अहादीषे मुबारका से अच्छी तरह स्पष्ट हो गया के इस्लाम में पड़ोसियों के अधिकार के मुतअल्लिक़ बहोत ज़्यादा महत्तवता दी गई हैं, लिहाज़ा हमें चाहिए के उन के तमाम अधिकार को अदा करने की भरपूर कोशिश करें...

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सुरतुल फ़ील की तफ़सीर

क्या आप को मालूम नहीं के आप के रब ने हाथी वालों के साथ कैसा मामला किया (१) क्या उस ने उन लोगों की सारी तदबीरें बेकार नहीं कर दी थीं (२) और उन पर झुंड के झुंड परिन्दे भेज दिए थे...

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इत्तेबाए सुन्नत का एहतेमाम – १

हम दुआ गो हैं के अल्लाह सुब्हानहु वतआला हम सब को अपनी ज़िन्दगी में नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की सुन्नतों पर मज़बूती से अमल करने में हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ (रज़ि.) और तमाम सहाबए किराम (रज़ि.) के नक़्शे क़दम (पदचिन्हों) पर चलने की तौफ़ीक़ मरहमत फ़रमाऐं. आमीन...

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दुरूदे इब्राहीम

حدثني عبد الله بن عيسى سمع عبد الرحمن بن أبي ليلى قال لقيني كعب بن عجرة فقال ألا أهدي لك ‏هدية سمعتها من النبي صلى الله عليه وسلم فقلت بلى فأهدها لي فقال سألنا رسول الله صلى الله عليه ‏وسلم فقلنا يا رسول الله كيف الصلاة عليكم أهل البيت فإن …

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अल्लाह तआला का मामला बंदे की आशा के अनुसार

अल्लाह तआला अपने बंदे के साथ रहमत और फ़ज़ल ही का मामला फ़रमाते हैं वह किसी की मेहनत और तलब को बेकार अथवा फ़रामोश (भूलते) नही फ़रमाते...

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मोहब्बत का बग़ीचा (एकिसवां प्रकरण)‎

ए बिशर ! तुम ने हमारा नाम ज़मीन से उठाया और उस में ख़ुश्बू लगाई, बेशक हम तुम्हारा नाम दुनिया और आख़िरत में रोशन करेंगे. इस अमल की वजह से अल्लाह तआला ने मुझे यह स्थान अता फरमाया है...

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लोगों को दीन की तरफ़ राग़िब करना

मौतो हयात का एतेबार नहीं, याद रखो, एक वसिय्यत करता हुं नसीहत करता हुं वह यह के जहां तक हो सके हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इत्तेबा की कोशिश करो. दूसरी बात जो इस वक़्त केहनी है वह यह के...

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