हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “यह भी नफ़अ से ख़ाली नही के अगर इन्सान कुछ भी न करे तो कम से कम उस को अहले हक़ से दुश्मनी (दीली बुग़्ज़ और कीना) तो न हो यह दुश्मनी बहोत ही ख़तरनाक चीज़ है.” (मलफ़ूज़ाते हकीमुल …
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कोई चीज़ भूलने के वक़्त दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عن أنس رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: إذا نسيتم شيئا فصلوا علي تذكروه إن شاء الله تعالى (أخرجه أبو موسى المديني بسند ضعيف كما في القول البديع صـ ٤٤۸) हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है के रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया …
اور پڑھوमोहब्बत का बग़ीचा (दसवां प्रकरण)
بسم الله الرحمن الرحيم घरों में बरकत और ख़ुशहाली कैसे आएगी? एक मर्तबा रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) सफ़र में थे. उसी उषना (दरमियान) में हज़रत आंयशा (रज़ि) ने घर के दरवाज़े पर एक परदा लटका दिया, जिस पर जानदार की तस्वीरें थीं, क्युंकि उस वक्त तक हज़रत आंयशा (रज़ि.) …
اور پڑھوग़ुसल की सुन्नतें और आदाब-५
ग़ुसल के फ़राईज़ (१) इस तरह कुल्ली करना के मुंह के हर हिस्से में पानी पहोंच जाए. (२) नाक में पानी ड़ालना (नरम हड्डी तक पानी पहोंचाना). (३) पूरे बदन पर पानी बहाना. [१] ग़ुसल की सुन्नते (१) नापाकी दूर करने और पाक होने की निय्यत करना. (२) अगर बदन …
اور پڑھوउलमा और बड़ो की बेअदबी अपना ही नुक़सान है
“उलमा और अईमए दीन की बेअदबी तथा उन के साथ बदगुमानी यह तो बहोत बडी बात है, सामान्य आदमी सामान्य मुसलमान की आबरू रेज़ी और बदगुमानी यह भी किसी तरह जाईज़ नहीं, उन बड़ों में से ख़ुदा न ख्वास्ता अगर किसी की बे अदबी हो गई, तो याद रखो के अपना सब कुछ खो बेठोगे.”...
اور پڑھوमुलाक़ात के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है के नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “दो एसे मुसलमान जो सिर्फ़ अल्लाह तआला के वास्ते आपस में मुहब्बत करते हैं, जब वह एक दूसरे से मुलाक़ात करते हैं...
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