Monthly Archives: June 2021

निकाह की सुन्नतें और आदाब – ७

शौहर को चाहिए के वह अपनी बिवी का लिहाज़ करे और उस के जज़बात का ख़्याल रखे, तमाम ऊमूर में उस के दिल को ख़ुश रखने की कोशिश करे...

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ग़ुसल की सुन्नतें और आदाब-४

(१) ग़ुसल के दौरान पानी बरबाद न करें. न तो बहोत ज़्यादह पानी इस्तेमाल करें और न इतना कम पानी इस्तेमाल करें के पूरे तौर पर बदन को धोना मुमकिन न हो...

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मोहब्बत का बग़ीचा (नवां प्रकरण)‎

بسم الله الرحمن الرحيم अल्लाह तआला और मख़लूक़ की अमानत अदा करने की महत्तवता अज्ञानता का युग और इस्लाम की शरूअत में उषमान बिन तलहा ख़ानऐ काअबा की चाबी के ज़िम्मेदार थे. उन का मामूल था के वह हर हफ़्ते पीर और जुमेरात के दिन ख़ानए काअबा का दरवाज़ा खोलते …

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दीन के काम की बरकात

हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब(रह.) ने एक मर्तबा फ़रमायाः “असल तो यही है के रज़ाए इलाही और उख़रवी अजर ही के लिए दीनी काम किया जाए, लेकिन तरग़ीब में मोक़े के हिसाब से दुन्यवी बरकात का भी ज़िक्र करना चाहिए. बाज़ आदमी एसे होते हैं के शुरूआतमें दुन्यवी बरकात ही …

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ग़ुसल की सुन्नतें और आदाब-३

ग़ुसल करने का मस्नून तरीक़ा (१) सर पर तीन मर्तबा पानी ड़ालना. [१] عن عائشة قالت كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا أراد أن يغتسل من الجنابة بدأ فغسل يديه قبل أن يدخلهما الإناء ثم غسل فرجه ويتوضأ وضوءه للصلاة ثم يشرب شعره الماء ثم يحثي على رأسه …

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मस्जिद में दाख़िल होने और मस्जिद से निकलने के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना

عن فاطمة رضي الله عنها قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا دخل المسجد صلى على محمد وسلم وقال رب اغفر لي ذنوبي وافتح لي أبواب رحمتك وإذا خرج صلى على محمد وسلم وقال رب اغفر لي ذنوبي وافتح لي أبواب فضلك (سنن الترمذي، الرقم: ٣١٤، وحسنه) हज़रत …

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राहत पहोंचाना फ़र्ज़ है

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः   “में ने तो हंमेशा इस का ख़्याल रखा के हुदूदे शरअ से तजावुज़ न हो. इस लिए में ने अपने बुज़र्गो की जुतियां उठाने की ख़िदमत नहीं की. महज़ इस ख़्याल से के वह पसंद न करते थे कहीं …

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ग़ुसल की सुन्नतें और आदाब-२

ग़ुसल करने का मस्नून तरीक़ा (१) ग़ुसल के शुरू में दोनों हाथों को गट्टों समेत धोना. [१] عن عائشة زوج النبي صلى الله عليه وسلم أن النبي صلى الله عليه وسلم كان إذا اغتسل من الجنابة بدأ فغسل يديه  (صحيح البخاري، الرقم: ۲٤۸) नबी (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ज़वजा उम्मुल …

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मोहब्बत का बग़ीचा (आठवां प्रकरण)

بسم الله الرحمن الرحيم जन्नत की कुंजी इस्लाम ही वह वाहिद मज़हब है जो अल्लाह तआला से मुहब्बत का रास्ता सिखाता है और जन्नत तक ले जाता है. इस्लामी तालीमात पर अमल करने से बंदे को अल्लाह तआला की ख़ुश्नुदी और दुनिया और आख़िरत में कामयाबी मिलती है. इस्लाम के …

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